MNR Unit I 2. development of cartography (traditional and modern)
जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर भूगोल प्रायोगिक — Cartography Development of Cartography: Traditional and Modern कॉलेज विद्यार्थियों के लिए परीक्षा-उपयोगी विस्तृत नोट्स --- 1. भूमिका (Introduction) Cartography (मानचित्रकला/मानचित्रण) भूगोल की महत्वपूर्ण प्रायोगिक शाखा है। पृथ्वी की सतह पर स्थित प्राकृतिक एवं मानवीय घटनाओं को मानचित्र, प्रतीकों, मापनी और विभिन्न तकनीकों के माध्यम से प्रदर्शित करने की प्रक्रिया को कार्टोग्राफी कहा जाता है। मानव ने अपने परिवेश, यात्रा मार्ग, जल स्रोत, शिकार क्षेत्र तथा निवास स्थान को समझने के लिए प्रारम्भ से ही विभिन्न प्रकार के चित्र एवं मानचित्र बनाए। समय के साथ सर्वेक्षण, गणित, मुद्रण तकनीक, फोटोग्राफी, कंप्यूटर, GIS, Remote Sensing एवं उपग्रह तकनीक के विकास ने कार्टोग्राफी को पूरी तरह बदल दिया। इसलिए कार्टोग्राफी के विकास को मुख्यतः दो चरणों में समझा जा सकता है— > Traditional Cartography (पारंपरिक कार्टोग्राफी) ↓ Modern Cartography (आधुनिक कार्टोग्राफी) --- 2. कार्टोग्राफी के विकास का सामान्य क्रम कार्टोग्राफी का विकास एक क्रमिक प्रक्रिय...