Sem V Unit l, II
JNVU Sem V
GEG 505P Cartography and Environmental Mapping
1. Study and interpretation of topographical sheets of typical areas of India;
2.Scheme of Indian topographical sheets with a complete knowledge of their latest version
3.Profile drawing: serial, super-imposed, composite and projected; Knowledge of vertical exaggeration
4. Geographical construction of following map projections: cylindrical projection; Simple Cylindrical (Equidistant), Cylindrical Equal Area, Mercator
5.:Reports: IPCC, MoEF, State of India’s Environment reports with vulnerability area mapping
GEG 505P कार्टोग्राफी और एनवायरनमेंटल मैपिंग
1. भारत के खास इलाकों की टोपोग्राफिकल शीट का अध्ययन और व्याख्या;
2. भारतीय टोपोग्राफिकल शीट की योजना और उनके लेटेस्ट वर्जन की पूरी जानकारी
3. प्रोफाइल ड्राइंग: सीरियल, सुपर-इम्पोज्ड, कम्पोजिट और प्रोजेक्टेड; वर्टिकल एग्जैगरेशन की जानकारी
4. निम्नलिखित मैप प्रोजेक्शन का भौगोलिक निर्माण: सिलिंड्रिकल प्रोजेक्शन; सिंपल सिलिंड्रिकल (इक्विडिस्टेंट), सिलिंड्रिकल इक्वल एरिया, मर्केटर
5. रिपोर्ट: IPCC, MoEF, भारत की पर्यावरण स्थिति रिपोर्ट जिसमें वल्नरेबिलिटी एरिया मैपिंग शामिल है
भूगोल प्रायोगिक (Practical Geography)
विषय : भारत के विशिष्ट क्षेत्रों के स्थलाकृतिक मानचित्रों का अध्ययन एवं व्याख्या (Study and Interpretation of Topographical Sheets of Typical Areas of India)
🗺️ परिचय (Introduction)
स्थलाकृतिक मानचित्र (Topographical Map) पृथ्वी की सतह के भौतिक एवं सांस्कृतिक (Natural and Cultural) लक्षणों को एक निश्चित पैमाने पर दर्शाने वाले वैज्ञानिक मानचित्र होते हैं।
इन मानचित्रों का मुख्य उद्देश्य किसी क्षेत्र की भूमि आकृति, जल निकाय, वनस्पति, बस्तियाँ, परिवहन मार्ग, ऊँचाई, ढाल आदि का विस्तृत चित्रण करना है।
भारत में स्थलाकृतिक मानचित्रों को Survey of India (भारतीय सर्वेक्षण विभाग) द्वारा तैयार किया जाता है।
स्थलाकृतिक मानचित्र की परिभाषा (Definition of Topographical Map)
“स्थलाकृतिक मानचित्र वे मानचित्र हैं जिन पर किसी क्षेत्र की प्राकृतिक तथा मानव निर्मित विशेषताएँ सटीक पैमाने पर दर्शाई जाती हैं।”
मुख्य उद्देश्य (Main Objectives)
1. किसी क्षेत्र की भू-आकृतिक (Physiographic) विशेषताओं का अध्ययन।
2. जल निकायों (नदियाँ, झीलें, तालाब, नहरें) का अध्ययन।
3. वनस्पति और भूमि उपयोग का विश्लेषण।
4. मानव बस्तियों, सड़कों, रेलमार्गों, नहरों आदि का पता लगाना।
5. किसी क्षेत्र की आर्थिक, सामाजिक और भौगोलिक स्थिति का अनुमान लगाना।
स्थलाकृतिक मानचित्र की पहचान (Identification of Toposheet)
हर स्थलाकृतिक मानचित्र पर एक शीट नंबर (Sheet Number) होता है, जिससे हम उसके स्थान की पहचान कर सकते हैं।
उदाहरण: 45D/7, 43P/12 आदि।
भारत को 1:250,000 पैमाने की सीरीज़ में बाँटा गया है, और हर बड़ी शीट को आगे छोटे वर्गों में बाँटकर 1:50,000 या 1:25,000 पैमाने के मानचित्र बनाए जाते हैं।
प्रयुक्त संकेत एवं चिह्न (Conventional Signs and Symbols)
इन मानचित्रों में कुछ मानक संकेत प्रयुक्त होते हैं, जैसे:
🔴 लाल रंग – बस्तियाँ, सड़कें, रेलमार्ग
🟢 हरा रंग – वनस्पति
🔵 नीला रंग – नदियाँ, तालाब, झीलें
🟤 भूरा रंग – ऊँचाई रेखाएँ (Contours)
⚫ काला रंग – सीमाएँ, नाम, भवन आदि
मुख्य तत्व (Main Elements of Topographical Sheet Study)
1. स्थान की स्थिति (Location)
शीट नंबर से मानचित्र का क्षेत्र पता लगाया जाता है।
अक्षांश (Latitude) और देशांतर (Longitude) रेखाएँ बताई जाती हैं।
2. स्केल (Scale)
सामान्य पैमाने – 1:50,000 या 1:25,000
स्केल से दूरी को वास्तविक धरातल दूरी में बदला जाता है।
3. ऊँचाई एवं ढाल (Relief and Slope)
ऊँचाई contour lines से दर्शाई जाती है।
Contour के बीच की दूरी जितनी कम, ढाल उतनी अधिक।
4. जल निकाय (Drainage Features)
नदियों की दिशा, स्रोत, प्रवाह क्षेत्र और जल निकासी का प्रकार (Radial, Dendritic, Trellis आदि)।
जलाशय, झील, नहर आदि का अध्ययन।
5. वनस्पति और भूमि उपयोग (Vegetation and Land Use)
मानचित्र में हरित क्षेत्र वनस्पति दर्शाते हैं।
कृषि भूमि, चरागाह, जंगल आदि का विश्लेषण।
6. मानव बस्तियाँ (Settlements)
बस्तियों के आकार (वृत्ताकार, रेखीय, बिखरी, सघन)।
सड़कें, रेलमार्ग, पुल, भवन आदि का अध्ययन।
7. परिवहन तंत्र (Transportation Network)
सड़कें (metalled, unmetalled), रेलमार्ग, नहरें, आदि।
8. सीमाएँ (Boundaries)
प्रशासनिक सीमाएँ, ग्राम, तहसील या जिला सीमाएँ।
स्थलाकृतिक मानचित्र की व्याख्या के चरण (Steps of Interpretation)
1. शीट की पहचान करें — शीट नंबर, पैमाना, दिशा, अक्षांश–देशांतर देखें।
2. प्राकृतिक विशेषताओं का अध्ययन करें — relief, drainage, vegetation।
3. सांस्कृतिक विशेषताओं का अध्ययन करें — settlements, roads, land use।
4. क्षेत्र का स्वरूप निकालें — यह क्षेत्र पहाड़ी, पठारी, मैदान या मरुस्थलीय है।
5. सामान्य निष्कर्ष लिखें — क्षेत्र की भौगोलिक विशेषताएँ, मानव-प्रकृति संबंध आदि।
भारत के विशिष्ट क्षेत्र जिनके स्थलाकृतिक मानचित्रों का अध्ययन किया जा सकता है
क्षेत्र मुख्य विशेषताएँ
राजस्थान का मरुस्थल क्षेत्र रेत के टीले, विरल बस्तियाँ, सीमित जल स्रोत
उत्तर भारत का पर्वतीय क्षेत्र (हिमालय) तीव्र ढाल, घनी वनस्पति, पर्वतीय नदियाँ
गंगा का मैदान समतल भूमि, घनी बस्तियाँ, कृषि प्रधान क्षेत्र
दक्कन का पठार लावा मैदान, छोटी नदियाँ, झरने
पूर्वोत्तर भारत घने वन, अधिक वर्षा, जनजातीय बस्तियाँ
स्थलाकृतिक मानचित्र से प्राप्त जानकारी का उपयोग (Uses of Toposheets)
1. भू-आकृतिक अध्ययन – स्थल रूप और उनकी विशेषताएँ।
2. कृषि नियोजन – भूमि उपयोग एवं फसल चयन।
3. जल संसाधन प्रबंधन – नदी, नहर और जलाशयों का उपयोग।
4. शहरी नियोजन – बस्तियों का विकास एवं संचार व्यवस्था।
5. पर्यावरणीय अध्ययन – वनों, मिट्टी और जलवायु का मूल्यांकन।
निष्कर्ष (Conclusion)
स्थलाकृतिक मानचित्र किसी क्षेत्र की भौतिक एवं मानव भूगोल की सबसे महत्वपूर्ण जानकारी का स्रोत हैं।
इनका अध्ययन क्षेत्र की भौगोलिक विशेषताओं को समझने, प्राकृतिक संसाधनों की पहचान करने और मानव गतिविधियों के वितरण को जानने में सहायक होता है।
इस प्रकार, स्थलाकृतिक मानचित्र का व्याख्यात्मक अध्ययन भूगोल के विद्यार्थियों के लिए एक आवश्यक प्रायोगिक कौशल है।
Topic: Study and Interpretation of Topographical Sheets of Typical Areas of India
Introduction
Topographical maps are scientific maps that depict the physical and cultural features of the Earth's surface at a specific scale.
The main purpose of these maps is to provide a detailed depiction of an area's landforms, water bodies, vegetation, settlements, transportation routes, elevation, slope, etc.
Topographical maps in India are prepared by the Survey of India.
Definition of Topographical Map
"Topographic maps are maps that depict the natural and man-made features of an area at an accurate scale."
Main Objectives
1. Study of the physiographic features of an area.
2. Study of water bodies (rivers, lakes, ponds, canals).
3. Analysis of vegetation and land use.
4. Locating human settlements, roads, railways, canals, etc.
5. Estimating the economic, social, and geographical status of an area.
Identification of Toposheet
Every topographic map has a sheet number, which helps us identify its location.
Examples: 45D/7, 43P/12, etc.
India is divided into 1:250,000 scale series, and each large sheet is further divided into smaller sections to create 1:50,000 or 1:25,000 scale maps.
Conventional Signs and Symbols
These maps use certain standard symbols, such as:
🔴 Red – settlements, roads, railways
🟢 Green – vegetation
🔵 Blue – rivers, ponds, lakes
🟤 Brown – contours
⚫ Black – boundaries, names, buildings, etc.
Main Elements of Topographical Sheet Study
1. Location
The sheet number identifies the map area.
Latitude and longitude lines are indicated.
2. Scale
Common scales – 1:50,000 or 1:25,000
Distances are converted from scale to actual ground distances.
3. Relief and Slope
Elevation is represented by contour lines.
The shorter the distance between contours, the greater the slope.
4. Drainage Features
The direction, source, flow area, and drainage type of rivers (radial, dendritic, trellis, etc.).
Study of reservoirs, lakes, canals, etc.
5. Vegetation and Land Use
Green areas on a map represent vegetation.
Analysis of agricultural land, pastures, forests, etc.
6. Settlements
Shapes of settlements (circular, linear, scattered, dense).
Study of roads, railways, bridges, buildings, etc.
7. Transportation Network
Roads (metalled, unmetalled), railways, canals, etc.
8. Boundaries
Administrative boundaries, village, tehsil, or district boundaries.
Steps of Interpretation of a Topographic Map
1. Identify the sheet—see sheet number, scale, direction, latitude and longitude.
2. Study the natural features—relief, drainage, vegetation.
3. Study the cultural features—settlements, roads, land use.
4. Determine the character of the area—is it mountainous, plateau, plain, or desert.
5. Write general conclusions—geographical features of the area, human-nature relationships, etc.
Specific regions of India that can be studied using topographic maps
Region Key Features
Desert region of Rajasthan: Sand dunes, sparse settlements, limited water sources
Mountainous region of North India (Himalayas): Steep slopes, dense vegetation, mountain rivers
Gangetic plain: Flat land, dense settlements, agricultural area
Deccan Plateau: Lava plains, small rivers, waterfalls
Northeast India: Dense forests, high rainfall, tribal settlements
Uses of Toposheets
1. Geomorphological studies – Landforms and their characteristics.
2. Agricultural planning – Land use and crop selection.
3. Water resource management – Use of rivers, canals, and reservoirs.
4. Urban planning – Settlement development and communication systems.
5. Environmental studies – Assessment of forests, soil, and climate.
Conclusion
Topographic maps are a vital source of information about the physical and human geography of a region.
Their study helps us understand the geographical features of an area, identify natural resources, and understand the distribution of human activities.
Thus, interpretive study of topographic maps is an essential practical skill for geography students.
विषय: राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र के स्थलाकृतिक मानचित्र का अध्ययन एवं व्याख्या
Topic: राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र के स्थलाकृतिक मानचित्र का अध्ययन एवं व्याख्या
(Study and Interpretation of Topographical Sheet of Desert Region of Rajasthan)
1. उद्देश्य (Objective):
1. राजस्थान के पश्चिमी मरुस्थलीय क्षेत्र की भौगोलिक विशेषताओं का अध्ययन करना।
2. स्थलाकृतिक मानचित्र की सहायता से प्राकृतिक (Relief, Drainage, Vegetation) और सांस्कृतिक (Settlements, Transport) तत्वों की पहचान करना।
3. क्षेत्र के भूमि उपयोग, जल स्रोतों और मानव बस्तियों के वितरण को समझना।
2. आवश्यक उपकरण (Apparatus / Materials Required):
स्थलाकृतिक मानचित्र (उदाहरण: Toposheet No. 45D/7 या 45E/3 — जैसलमेर क्षेत्र)
स्केल, पेंसिल, रबर, प्रोटेक्टर
रंगीन पेंसिलें
प्रायोगिक कॉपी या फ़ाइल
3. अध्ययन क्षेत्र (Area of Study):
राजस्थान का पश्चिमी भाग, विशेष रूप से जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर जिलों के आस-पास का क्षेत्र।
यह क्षेत्र थार मरुस्थल (Thar Desert) के अंतर्गत आता है।
4. विधि / प्रक्रिया (Method / Procedure):
1. स्थलाकृतिक मानचित्र की शीट संख्या और पैमाना देखें (आम तौर पर 1:50,000)।
2. उत्तर दिशा का निर्धारण करें।
3. Contour lines से ऊँचाई और ढाल का अध्ययन करें।
4. जल निकाय (नदियाँ, नाले, तालाब) और उनका प्रवाह दिशा ज्ञात करें।
5. Vegetation और Land use pattern को चिन्हों से पहचानें।
6. Settlements (गाँव या कस्बे) और सड़कों का वितरण देखें।
7. सभी सूचनाओं को तालिका व वर्णनात्मक रूप में व्यवस्थित करें।
5. अवलोकन (Observation):
अवलोकन बिंदु विवरण
स्थल आकृति (Relief) समतल एवं रेतीला मैदान; स्थान–स्थान पर रेत के टीले (Sand Dunes)।
ऊँचाई (Altitude) औसतन 150–300 मीटर के बीच।
ढाल (Slope) पूर्व की ओर हल्की ढाल।
नदी तंत्र (Drainage) स्थायी नदियाँ नहीं; कुछ मौसमी नाले जैसे – लूनी नदी (Luni River) क्षेत्र में बहती है।
जल निकाय (Water Bodies) सीमित तालाब व कुएँ; भूमिगत जल की गहराई अधिक।
वनस्पति (Vegetation) विरल एवं शुष्क वनस्पति – खेजड़ी, कुमठा, बबूल, थोर आदि।
भूमि उपयोग (Land Use) मरुस्थलीय कृषि, पशुपालन, चारागाह।
बस्तियाँ (Settlements) विरल, बिखरी हुई; अधिकांश गाँव जल स्रोतों के समीप।
परिवहन (Transport) मुख्यतः कच्ची सड़कें; कुछ पक्के मार्ग जोधपुर-जैसलमेर दिशा में।
6. व्याख्या (Interpretation):
राजस्थान का पश्चिमी क्षेत्र थार मरुस्थल के अंतर्गत आता है।
यहाँ की भूमि रेतीली एवं शुष्क है। Contour lines दूर-दूर हैं, जिससे पता चलता है कि यह क्षेत्र समतल है।
यहाँ स्थायी नदियाँ नहीं हैं, केवल मौसमी नाले जैसे लूनी नदी मानसूनी वर्षा के समय सक्रिय होती है।
वनस्पति बहुत कम है, मुख्य रूप से कांटेदार झाड़ियाँ और झाड़-पौधे पाए जाते हैं।
बस्तियाँ जल स्रोतों के आसपास सीमित हैं और कृषि सिंचाई पर निर्भर है।
मुख्य आजीविका पशुपालन (ऊँट, बकरी, भेड़) और सीमित कृषि है।
मानचित्र में जल स्रोत, नाले, सड़कें और बस्तियाँ विरल रूप से फैली हुई दिखाई देती हैं, जो इस क्षेत्र की शुष्कता को दर्शाती हैं।
7. परिणाम (Result / Findings):
1. अध्ययन क्षेत्र पूर्णतः शुष्क और अर्ध-शुष्क है।
2. प्राकृतिक जल स्रोतों की कमी के कारण कृषि सीमित है।
3. भू-आकृतिक रूप से यह क्षेत्र समतल एवं रेतीला है।
4. मानव बस्तियाँ विरल हैं और मुख्यतः जल के समीप स्थित हैं।
5. वनस्पति विरल एवं कांटेदार झाड़ियों के रूप में है।
🧾 8. निष्कर्ष (Conclusion):
राजस्थान का मरुस्थलीय क्षेत्र स्थलाकृतिक दृष्टि से एक शुष्क एवं समतल मैदान है जहाँ जल की अत्यधिक कमी, रेत के टीले और विरल जनसंख्या मुख्य विशेषताएँ हैं।
यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि स्थलाकृतिक मानचित्र किसी क्षेत्र की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं को वैज्ञानिक रूप से समझने का सर्वोत्तम माध्यम है।
🖍️ 9. आकृतियाँ (Illustrations to Draw in File):
1. थार मरुस्थल का रूपरेखा मानचित्र (Rajasthan map showing desert region)
2. Sand Dune का आकृति चित्र
3. Contour diagram showing gentle slope
4. Settlement pattern (Sparse and scattered)
Sem V :- Unit II
Scheme of Indian Topographical Sheets
1. टोपोग्राफिकल शीट (Topographical Sheet) क्या है?
टोपोग्राफिकल शीट वह मानचित्र होता है जिसमें पृथ्वी की सतह के प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक (मानवीय) विशेषताओं का विस्तृत चित्रण होता है।
इनमें दिखाया जाता है—
स्थलरूप (Relief)
नदियाँ, झीलें
सड़के, रेल मार्ग
गाँव, शहर
ऊँचाई (Contours)
वनस्पति, मिट्टी
प्रशासनिक सीमा
इन चित्रों को भारत में Survey of India (SOI) द्वारा बनाया जाता है।
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2. भारत के टोपोशीट का नवीनतम संस्करण (Latest Version)
भारत में टोपोशीट के लिए अब दो प्रमुख प्रणालियाँ प्रयोग में हैं—
(1) Old System – Degree, Half-degree, Quarter Sheets (पुरानी प्रणाली)
(2) New System – Open Series Maps (OSM) / Defence Series Maps (DSM)
▶ नवीनतम प्रणाली: OSM/DSM (Open Series Maps / Defence Series Maps)
वर्ष 2005 के बाद नई प्रणाली लागू
WGS-84 Datum और UTM Projection पर आधारित
Grid आधारित मानचित्र
सर्वाधिक आधुनिक और GPS संगत
स्केल मुख्यतः 1:50,000
नागरिक उपयोग के लिए OSM
सुरक्षा कारणों से सेना के लिए DSM
इनमें पुराने नंबरों के बजाय ग्रिड आधारित “गोपनीय रहित” नंबर उपयोग होते हैं।
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3. पुरानी प्रणाली (Old Toposheet Scheme)
यह परीक्षा में सबसे ज्यादा पूछा जाता है।
भारत की संपूर्ण भूमि को निम्न प्रकार बाँटा गया था—
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(A) Degree Sheets (डिग्री शीट्स) – 1° × 1°
भारत को 1° अक्षांश × 1° देशांतर के खंडों में विभाजित किया गया।
कुल 105 डिग्री शीट बनाए गए।
इन शीट्स को 1 से 105 तक नंबर दिए गए।
उदाहरण:
शीट 45
शीट 56
शीट 52 आदि
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(B) Half-degree Sheets (अर्ध-डिग्री शीट) – 30’ × 30’
प्रत्येक डिग्री शीट को 4 भागों में बाँटा गया—
A – उत्तरी-पश्चिम
B – उत्तरी-पूर्व
C – दक्षिणी-पश्चिम
D – दक्षिणी-पूर्व
उदाहरण:
45 D, 56 C
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(C) Quarter Sheets (क्वार्टर शीट) – 15’ × 15’
प्रत्येक Half-degree शीट को 4 भागों में बाँटा गया—
1, 2, 3, 4
उदाहरण:
45 D/7, 56 C/2
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4. भारत में सर्वाधिक प्रयोग होने वाला स्केल
भारत में टोपोग्राफिकल शीट्स का प्रमुख स्केल है—
1 : 50,000
अर्थात मानचित्र पर 1 सेमी = भूमि पर 500 मीटर।
पहले 1:25,000 और 1:63,360 स्केल भी प्रचलित थे, पर अब 1:50,000 सबसे अधिक उपयोग में है।
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5. शीट नंबर पढ़ने का तरीका (Reading the Toposheet Number)
उदाहरण:
45 D/7
● 45 → Degree Sheet
● D → Half-degree Sheet
● 7 → Quarter Sheet
मतलब :
एक ऐसा खंड जो 15’ × 15’ क्षेत्र दर्शाता है।
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6. टोपोशीट में प्रदर्शित तत्व (Features Shown on Toposheets)
टोपोशीट में प्राकृतिक व सांस्कृतिक दोनों विशेषताएँ होती हैं—
(A) प्राकृतिक विशेषताएँ (Natural Features):
पर्वत, पहाड़, पठार
नदियाँ, जलाशय
मिट्टी, वनस्पति
ऊँचाई (Contours)
ढाल दिशा (Slope)
(B) सांस्कृतिक विशेषताएँ (Cultural Features):
सड़कें, रेलवे
बस्तियाँ
कुएँ, ट्यूबवेल
विद्युत लाइन
डाकघर, स्कूल, मंदिर आदि
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7. Contours और Spot Heights
Contours टोपोशीट का सबसे महत्वपूर्ण भाग है।
यह समान ऊँचाई वाले बिंदुओं को जोड़ती है।
Interval (उदासीनता) सामान्यतः 20 मीटर।
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8. Toposheet Symbols (चिह्न)
SOI ने प्रतीकों की एक मानक सूची निर्धारित की है—
काला रंग — मानव निर्मित वस्तुएँ
नीला रंग — जल संबंधी विशेषताएँ
भूरा रंग — ऊँचाई व कंटूर
हरा रंग — वनस्पति
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9. नए OSM/DSM मानचित्र की विशेषताएँ (Latest Features)
पूरी तरह डिजिटल
GPS आधारित
उच्च सटीकता
डेटम: WGS-84
प्रोजेक्शन: UTM
1 km × 1 km grid
सुरक्षा कारणों से संवेदनशील भाग सीमित
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10. परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रमुख प्रश्न
लघु उत्तर (Short Questions)
1. टोपोग्राफिकल मानचित्र क्या है?
2. डिग्री शीट क्या होती है?
3. Contour क्या है?
4. OSM क्या है?
दीर्घ उत्तर (Long Questions)
1. भारतीय टोपोग्राफिकल शीट की योजना (Scheme) का वर्णन करें।
2. टोपोशीट के नवीनतम संस्करण (OSM/DSM) की विशेषताओं का वर्णन करें।
3. 45 D/7 नंबर को पढ़कर समझाएँ।
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निष्कर्ष
भारतीय टोपोग्राफिकल शीट्स भारत की भौगोलिक जानकारी का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
पुरानी प्रणाली (1° – 30′ – 15′) परीक्षा में अधिक पूछी जाती है।
नई प्रणाली (OSM/DSM) आधुनिक GIS और GPS आधारित है।
दोनों का ज्ञान व्यावहारिक भूगोल के लिए अत्यंत आवश्यक है।
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